Thursday, February 10, 2011

कश्मीर के प्रति

                                  
 ओ      हिंद    वीर  के  उच्च  भाल,किन्नरियों  के  पावन,  सुदेश |
तेरी  महिमा  का  अमित  गान ,कर  सकते  क्या  सारद  गणेश ||१||

सौन्दर्य  सलिल  सरवर  है  तू ,नर  नलिन  जहाँ  सर्वत्र  खिले |
मधुकरी  किन्नरी  वार  चुकी , मधु -रस  लेकर  मन  मुक्त  भले ||२||

पर्वत  पयस्विनी  पादप  गन , पुष्पावली  पावन  विविध  रंग |
आभूषित   कलित  मृदुल  मधु  मय , प्रकृति  वनिता  के  विविध  रंग ||३||

केसर  कल  कंज  विहारिण  हो , वर  प्रकृति  पद्मनी  वाम  बनी |
नर  की  क्या  गणना   है  जिस  पर , मोहित  होते  सुर  यक्ष  मुनि ||४||

तेरी  कल  कंज  कली  केसर , बादाम  दाम  सी  फुलवारी |
फल  फुल्ल -फुल  मधुमय  मेवा , निर्झर  प्रपात  हिममय  वारी ||५||

भारत  माता  का  तू  ललाट , पृथ्वी  का  नंदन  सा  कानन |
अथवा  तू  भारत  भामिनी  का , मंजुल  मयंक  सा  है  आनन ||६||

कुछ  तीव्र  त्वरित  गति  से  बहती , इठलाती  सी  इतराती  सी |
नव  वधु  वितस्ता  तव  हिय  पर , कल  कलिका  सी  कलपाती सी  ||७||

उसमें  कंजादिक  विविध  पुष्प , मानो  बहु  दीप  सुहाते  हैं |
अपने  प्रियतम  की  आरती  को , आरत  हर  वारे  जाते  हैं ||८||

तरनी  तटनी  शीतल  जल  में , जब  खोल  पाल  को  बहती  है  |
मनो  अलका  नगरी  नभ  में , पर  खोल  परी  बहु  उडती  हैं ||९||

त्वरिता  गति  से  वे  आ जा कर , इतराना  अमित  दिखाती  हैं  |
लहरों  से  लह  कर  सलिल  घाट , अनुपम  नव  नृत्य  दिखाती  हैं ||१०||

3 comments:

  1. अपने दादाजी के लिए बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे हैं आप शेखर भाई| इस महत्कर्म के लिए आप निश्चय ही साधुवाद के पात्र हैं| मैने इस ब्लॉग को अपने ब्लॉग की वॉल पर शेयर कर लिया है| अब आप इस का आगे का कम बढ़ाईएगा|

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  2. नवीन जी के ब्लाग से पहुंचा इधर |
    कश्मीर पर बढ़िया रचना ||
    एक मंथर गति से बहती हुई शांत रचना ||
    बधाई ||

    साहित्य वारिधि स्व. डा. शंकर लाल चतुर्वेदी जी का जीवन परिचय और रचनाएँ ||

    सदर प्रणाम ||

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  3. तरनी तटनी शीतल जल में , जब खोल पाल को बहती है |
    मनो अलका नगरी नभ में , पर खोल परी बहु उडती हैं ||९||
    waah

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सुधाकर जी द्वारा अर्जित सम्मान / पुरस्कार

डॉ चतुर्वेदी केंद्रीय विद्यालय, कलांकर एवं साहित्य सम्मलेन प्रयाग आदि अनेक संस्थओं से सम्मानित किये गये ब्रज साहित्य संगम, मथुरा ने ब्रज विभूति तथा साहित्य सम्मलेन प्रयाग ने साहित्य वारिधि की मानद उपाधि से विभूषित किया आपको तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के द्वारा सेवाश्री सम्मान भी प्राप्त हुआ